सूरह अल-अनकबूत

وَتِلْكَ ٱلْأَمْثَـٰلُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ ۖ وَمَا يَعْقِلُهَآ إِلَّا ٱلْعَـٰلِمُونَ

Wa tilkal-amṡālu naḍribuhā lin-nās(i), wa mā ya‘qiluhā illal-‘ālimūn(a).

ये मिसालें हम लोगों के लिए पेश करते है, परन्तु इनको ज्ञानवान ही समझते है

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