सूरह अल-अनकबूत
إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰٓ أَهْلِ هَـٰذِهِ ٱلْقَرْيَةِ رِجْزًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ بِمَا كَانُوا۟ يَفْسُقُونَ
Innā munzilūna ‘alā ahli hāżihil-qaryati rijzam minas-samā'i bimā kānū yafsuqūn(a).
निश्चय ही हम इस बस्ती के लोगों पर आकाश से एक यातना उतारनेवाले है, इस कारण कि वे बन्दगी की सीमा से निकलते रहे है।"
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