सूरह अल-हाक़्क़ा

لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَآ أُذُنٌ وَٰعِيَةٌ

Linaj‘alahā lakum tażkirataw wa ta‘iyahā użunuw wā‘iyah(tun).

ताकि उसे तुम्हारे लिए हम शिक्षाप्रद यादगार बनाएँ और याद रखनेवाले कान उसे सुरक्षित रखें

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