सूरह अल-हाक़्क़ा
لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَآ أُذُنٌ وَٰعِيَةٌ
Linaj‘alahā lakum tażkirataw wa ta‘iyahā użunuw wā‘iyah(tun).
ताकि उसे तुम्हारे लिए हम शिक्षाप्रद यादगार बनाएँ और याद रखनेवाले कान उसे सुरक्षित रखें
सभी आयत 52 आयत
لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَآ أُذُنٌ وَٰعِيَةٌ
Linaj‘alahā lakum tażkirataw wa ta‘iyahā użunuw wā‘iyah(tun).
ताकि उसे तुम्हारे लिए हम शिक्षाप्रद यादगार बनाएँ और याद रखनेवाले कान उसे सुरक्षित रखें
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