सूरह अल-हाक़्क़ा

إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ ٱلْعَظِيمِ

Innahū kāna lā yu'minu billāhil-‘aẓīm(i).

"वह न तो महिमावान अल्लाह पर ईमान रखता था

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