सूरह अल-हाक़्क़ा
إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ ٱلْعَظِيمِ
Innahū kāna lā yu'minu billāhil-‘aẓīm(i).
"वह न तो महिमावान अल्लाह पर ईमान रखता था
सभी आयत 52 आयत
إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ ٱلْعَظِيمِ
Innahū kāna lā yu'minu billāhil-‘aẓīm(i).
"वह न तो महिमावान अल्लाह पर ईमान रखता था
क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।