सूरह अल-हाक़्क़ा

وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ

Wa lā biqauli kāhin(in), qalīlam mā tażakkarūn(a).

और न वह किसी काहिन का वाणी है। तुम होश से थोड़े ही काम लेते हो

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