सूरह अल-हाक़्क़ा
فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌ وَٰحِدَةٌ
Fa iżā nufikha fiṣ-ṣūri nafkhatuw wāḥidah(tun).
तो याद रखो जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी,
सभी आयत 52 आयत
فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌ وَٰحِدَةٌ
Fa iżā nufikha fiṣ-ṣūri nafkhatuw wāḥidah(tun).
तो याद रखो जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी,
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