सूरह अल-हाक़्क़ा

فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌ وَٰحِدَةٌ

Fa iżā nufikha fiṣ-ṣūri nafkhatuw wāḥidah(tun).

तो याद रखो जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी,

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