सूरह अल-हाक़्क़ा

إِنِّى ظَنَنتُ أَنِّى مُلَـٰقٍ حِسَابِيَهْ

Innī ẓanantu annī mulāqin ḥisābiyah.

"मैं तो समझता ही था कि मुझे अपना हिसाब मिलनेवाला है।"

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