सूरह अल-हाक़्क़ा
وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ
Wa lam adri mā ḥisābiyah.
और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
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وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ
Wa lam adri mā ḥisābiyah.
और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
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