सूरह अल-हाक़्क़ा

وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ

Wa lam adri mā ḥisābiyah.

और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!

सभी आयत 52 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।