सूरह अल-हाक़्क़ा
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
Wa lā yaḥuḍḍu ‘alā ṭa‘āmil-miskīn(i).
और न मुहताज को खाना खिलाने पर उभारता था
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وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
Wa lā yaḥuḍḍu ‘alā ṭa‘āmil-miskīn(i).
और न मुहताज को खाना खिलाने पर उभारता था
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