सूरह अल-फुरक़ान

أَلَمْ تَرَ إِلَىٰ رَبِّكَ كَيْفَ مَدَّ ٱلظِّلَّ وَلَوْ شَآءَ لَجَعَلَهُۥ سَاكِنًا ثُمَّ جَعَلْنَا ٱلشَّمْسَ عَلَيْهِ دَلِيلًا

Alam tara ilā rabbika kaifa maddaẓ-ẓill(a), wa lau syā'a laja‘alahū sākinā(n), ṡumma ja‘alnasy-syamsa ‘alaihi dalīlā(n).

क्या तुमने अपने रब को नहीं देखा कि कैसे फैलाई छाया? यदि चाहता तो उसे स्थिर रखता। फिर हमने सूर्य को उसका पता देनेवाला बनाया,

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