सूरह अल-फुरक़ान

يَـٰوَيْلَتَىٰ لَيْتَنِى لَمْ أَتَّخِذْ فُلَانًا خَلِيلًا

Yā wailatā laitanī lam attakhiż fulānan khalīlā(n).

हाय मेरा दुर्भाग्य! काश, मैंने अमुक व्यक्ति को मित्र न बनाया होता!

📝 टिप्पणी
530) 'अमुक व्यक्ति' (फ़ुलाँ) से तात्पर्य शैतान से है, या उस व्यक्ति से है जिसने उसे दुनिया में गुमराह किया था।

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