सूरह अल-फुरक़ान
وَقَالُوٓا۟ أَسَـٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ ٱكْتَتَبَهَا فَهِىَ تُمْلَىٰ عَلَيْهِ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
Wa qālū asāṭīrul-awwalīnaktatabahā fa hiya tumlā ‘alaihi bukrataw wa aṣīlā(n).
कहते है, "ये अगलों की कहानियाँ है, जिनको उसने लिख लिया है तो वही उसके पास प्रभात काल और सन्ध्या समय लिखाई जाती है।"
सभी आयत 77 आयत