सूरह अल-फुरक़ान
ثُمَّ قَبَضْنَـٰهُ إِلَيْنَا قَبْضًا يَسِيرًا
Ṡumma qabaḍnā ilainā qabḍay yasīrā(n).
फिर हम उसको धीरे-धीरे अपनी ओर समेट लेते है
📝 टिप्पणी
533) इस वाक्य का अर्थ यह है कि उस परछाईं को हम सूर्य के ढलने (अस्त होने) के स्थान की ओर बढ़ने के साथ-साथ धीरे-धीरे समाप्त कर देते हैं।
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