सूरह अल-फुरक़ान

لِّنُحْـِۧىَ بِهِۦ بَلْدَةً مَّيْتًا وَنُسْقِيَهُۥ مِمَّا خَلَقْنَآ أَنْعَـٰمًا وَأَنَاسِىَّ كَثِيرًا

Linuḥyiya bihī baldatam maitaw wa nusqiyahū mimmā khalaqnā an‘āmaw wa anāsiyya kaṡīrā(n).

ताकि हम उसके द्वारा निर्जीव भू-भाग को जीवन प्रदान करें और उसे अपने पैदा किए हुए बहुत-से चौपायों और मनुष्यों को पिलाएँ

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