सूरह अल-फुरक़ान

وَٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِّرُوا۟ بِـَٔايَـٰتِ رَبِّهِمْ لَمْ يَخِرُّوا۟ عَلَيْهَا صُمًّا وَعُمْيَانًا

Wal-lażīna iżā żukkirū bi'āyāti rabbihim lam yakhirrū ‘alaihā ṣummaw wa ‘umyānā(n).

जो ऐसे हैं कि जब उनके रब की आयतों के द्वारा उन्हें याददिहानी कराई जाती है तो उन (आयतों) पर वे अंधे और बहरे होकर नहीं गिरते।

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