सूरह अल-फुरक़ान

وَتَوَكَّلْ عَلَى ٱلْحَىِّ ٱلَّذِى لَا يَمُوتُ وَسَبِّحْ بِحَمْدِهِۦ ۚ وَكَفَىٰ بِهِۦ بِذُنُوبِ عِبَادِهِۦ خَبِيرًا

Wa tawakkal ‘alal-ḥayyil-lażī lā yamūtu wa sabbiḥ biḥamdih(ī), wa kafā bihī biżunūbi ‘ibādihī khabīrā(n).

और उस अल्लाह पर भरोसा करो जो जीवन्त और अमर है और उसका गुणगान करो। वह अपने बन्दों के गुनाहों की ख़बर रखने के लिए काफ़ी है

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