सूरह सबा

فَأَعْرَضُوا۟ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ سَيْلَ ٱلْعَرِمِ وَبَدَّلْنَـٰهُم بِجَنَّتَيْهِمْ جَنَّتَيْنِ ذَوَاتَىْ أُكُلٍ خَمْطٍ وَأَثْلٍ وَشَىْءٍ مِّن سِدْرٍ قَلِيلٍ

Fa a‘raḍū fa arsalnā ‘alaihim sailal-‘arimi wa baddalnāhum bijannataihim jannataini żawātai ukulin khamṭiw wa aṡliw wa syai'im min sidrin qalīl(in).

किन्तु वे ध्यान में न लाए तो हमने उनपर बँध-तोड़ बाढ़ भेज दी और उनके दोनों बाग़ों के बदले में उन्हें दो दूसरे बाग़ दिए, जिनमें कड़वे-कसैले फल और झाड़ थे, और कुछ थोड़ी-सी झड़-बेरियाँ

📝 टिप्पणी
624) मारिब (माआरिब) बाँध के टूटने के कारण आई एक भीषण बाढ़ (सैल-ए-अरम)।

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