सूरह सबा

وَحِيلَ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَا يَشْتَهُونَ كَمَا فُعِلَ بِأَشْيَاعِهِم مِّن قَبْلُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ فِى شَكٍّ مُّرِيبٍۭ

Wa ḥīla bainahum wa baina mā yasytahūn(a), kamā fu‘ila bi'asy-yā‘ihim min qabl(u), innahum fī syakkim murīb(in).

उनके और उनकी चाहतों के बीच रोक लगा दी जाएगी; जिस प्रकार इससे पहले उनके सहमार्गी लोगों के साथ मामला किया गया। निश्चय ही वे डाँवाडोल कर देनेवाले संदेह में पड़े रहे हैं

📝 टिप्पणी
630) वे जो चाहते हैं वह ईमान लाना (विश्वास करना) या पश्चाताप (तौबा) करने के लिए दुनिया में वापस लौटना है।

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