सूरह सबा
قُلْ جَآءَ ٱلْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ ٱلْبَـٰطِلُ وَمَا يُعِيدُ
Qul jā'al-ḥaqqu wa mā yubdi'ul-bāṭilu wa mā yu‘īd(u).
कह दो, "सत्य आ गया (असत्य मिट गया) और असत्य न तो आरम्भ करता है और न पुनरावृत्ति ही।"
📝 टिप्पणी
629) जब सत्य (हक़) आ जाता है, तो असत्य (बातिल) नष्ट और समाप्त हो जाता है। उस सत्य का मुकाबला करने या उसे गिराने के लिए कोई भी कुछ करने का सामर्थ्य नहीं रखता।
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