सूरह सबा

فَٱلْيَوْمَ لَا يَمْلِكُ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ نَّفْعًا وَلَا ضَرًّا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ذُوقُوا۟ عَذَابَ ٱلنَّارِ ٱلَّتِى كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ

Fal-yauma lā yamliku ba‘ḍukum liba‘ḍin naf‘aw wa ḍarrā(n), wa naqūlu lil-lażīna ẓalamū żūqū ‘ażāban-nāril-latī kuntum bihā tukażżibūn(a).

"अतः आज न तो तुम परस्पर एक-दूसरे के लाभ का अधिकार रखते हो और न हानि का।" और हम उन ज़ालिमों से कहेंगे, "अब उस आग की यातना का मज़ा चखो, जिसे तुम झुठलाते रहे हो।"

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