सूरह सबा
فَقَالُوا۟ رَبَّنَا بَـٰعِدْ بَيْنَ أَسْفَارِنَا وَظَلَمُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ فَجَعَلْنَـٰهُمْ أَحَادِيثَ وَمَزَّقْنَـٰهُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
Fa qālū rabbanā bā‘id baina asfārinā wa ẓalamū anfusahum fa ja‘alnāhum aḥādīṡa wa mazzaqnāhum kulla mumazzaq(in), inna fī żālika la'āyātil likulli ṣabbārin syakūr(in).
किन्तु उन्होंने कहा, "ऐ हमारे रब! हमारी यात्राओं में दूरी कर दे।" उन्होंने स्वयं अपने ही ऊपर ज़ुल्म किया। अन्ततः हम उन्हें (अतीत की) कहानियाँ बनाकर रहे, औऱ उन्हें बिल्कुल छिन्न-भिन्न कर डाला। निश्चय ही इसमें निशानियाँ है प्रत्येक बड़े धैर्यवान, कृतज्ञ के लिए
📝 टिप्पणी
626) उन्होंने माँग की कि उन पास-पास स्थित बस्तियों को दूर (समाप्त) कर दिया जाए ताकि यात्रा लंबी हो जाए और वे व्यापार पर अपना एकाधिकार (मोनोपॉली) स्थापित करके अधिक से अधिक लाभ कमा सकें।