सूरह अल-वाक़िआ

لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزِفُونَ

Lā yuṣadda‘ūna ‘anhā wa lā yunzifūn(a).

- जिस (के पीने) से न तो उन्हें सिर दर्द होगा और न उनकी बुद्धि में विकार आएगा

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