सूरह अल-वाक़िआ

لَوْ نَشَآءُ جَعَلْنَـٰهُ أُجَاجًا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ

Lau nasyā'u ja‘alnāhu ujājan falau lā tasykurūn(a).

यदि हम चाहें तो उसे अत्यन्त खारा बनाकर रख दें। फिर तुम कृतज्ञता क्यों नहीं दिखाते?

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