सूरह अल-वाक़िआ
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ
Wa taj‘alūna rizqakum annakum tukażżibūn(a).
और तुम इसको अपनी वृत्ति बना रहे हो कि झुठलाते हो?
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وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ
Wa taj‘alūna rizqakum annakum tukażżibūn(a).
और तुम इसको अपनी वृत्ति बना रहे हो कि झुठलाते हो?
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