सूरह अल-वाक़िआ
وَكَانُوا۟ يُصِرُّونَ عَلَى ٱلْحِنثِ ٱلْعَظِيمِ
Wa kānū yuṣirrūna ‘alal-ḥinṡil-‘aẓīm(i).
और बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे
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وَكَانُوا۟ يُصِرُّونَ عَلَى ٱلْحِنثِ ٱلْعَظِيمِ
Wa kānū yuṣirrūna ‘alal-ḥinṡil-‘aẓīm(i).
और बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे
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