सूरह अल-वाक़िआ

عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَـٰلَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِى مَا لَا تَعْلَمُونَ

‘Alā an nubaddila amṡālakum wa nunsyi'akum fī mā lā ta‘lamūn(a).

कि हम तुम्हारे जैसों को बदल दें और तुम्हें ऐसी हालत में उठा खड़ा करें जिसे तुम जानते नहीं

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