सूरह अल-वाक़िआ
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ
Wa aṣḥābul-yamīn(i), mā aṣḥābul-yamīn(i).
रहे सौभाग्यशाली लोग, तो सौभाग्यशालियों का क्या कहना!
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وَأَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ
Wa aṣḥābul-yamīn(i), mā aṣḥābul-yamīn(i).
रहे सौभाग्यशाली लोग, तो सौभाग्यशालियों का क्या कहना!
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