सूरह अल-वाक़िआ
وَكَانُوا۟ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
Wa kānū yaqūlūn(a), a'iżā mitnā wa kunnā turābaw wa ‘iẓāman a'innā lamab‘ūṡūn(a).
कहते थे, "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ होकर रहे जाएँगे, तो क्या हम वास्तव में उठाए जाएँगे?
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