सूरह मरयम

وَجَعَلَنِى مُبَارَكًا أَيْنَ مَا كُنتُ وَأَوْصَـٰنِى بِٱلصَّلَوٰةِ وَٱلزَّكَوٰةِ مَا دُمْتُ حَيًّا

Wa ja‘alanī mubārakan aina mā kunt(u), wa auṣānī biṣ-ṣalāti waz-zakāti mā dumtu ḥayyā(n).

और मुझे बरकतवाला किया जहाँ भी मैं रहूँ, और मुझे नमाज़ और ज़कात की ताकीद की, जब तक कि मैं जीवित रहूँ

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