सूरह मरयम
لَّا يَمْلِكُونَ ٱلشَّفَـٰعَةَ إِلَّا مَنِ ٱتَّخَذَ عِندَ ٱلرَّحْمَـٰنِ عَهْدًا
Lā yamlikūnasy-syafā‘ata illā manittakhaża ‘indar-raḥmāni ‘ahdā(n).
उन्हें सिफ़ारिश का अधिकार प्राप्त न होगा। सिवाय उसके, जिसने रहमान के यहाँ से अनुमोदन प्राप्त कर लिया हो
📝 टिप्पणी
465) अल्लाह सुब्हानहू व तआला से वचन (अहद) लेने का अर्थ यह है कि उन पर ईमान लाया जाए, उनके आदेशों का पालन किया जाए और उनके प्रति तक़्वा (ईश-भीरुता) रखा जाए।
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