सूरह मरयम

لَّا يَمْلِكُونَ ٱلشَّفَـٰعَةَ إِلَّا مَنِ ٱتَّخَذَ عِندَ ٱلرَّحْمَـٰنِ عَهْدًا

Lā yamlikūnasy-syafā‘ata illā manittakhaża ‘indar-raḥmāni ‘ahdā(n).

उन्हें सिफ़ारिश का अधिकार प्राप्त न होगा। सिवाय उसके, जिसने रहमान के यहाँ से अनुमोदन प्राप्त कर लिया हो

📝 टिप्पणी
465) अल्लाह सुब्हानहू व तआला से वचन (अहद) लेने का अर्थ यह है कि उन पर ईमान लाया जाए, उनके आदेशों का पालन किया जाए और उनके प्रति तक़्वा (ईश-भीरुता) रखा जाए।

सभी आयत 98 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।