सूरह मरयम
يَـٰيَحْيَىٰ خُذِ ٱلْكِتَـٰبَ بِقُوَّةٍ ۖ وَءَاتَيْنَـٰهُ ٱلْحُكْمَ صَبِيًّا
Yā yaḥyā khużil-kitāba biquwwah(tin), wa ātaināhul-ḥukma ṣabiyyā(n).
"ऐ यह्याऔ! किताब को मज़बूत थाम ले।" हमने उसे बचपन ही में निर्णय-शक्ति प्रदान की,
📝 टिप्पणी
460) इसका अर्थ यह है कि, “तौरात का अध्ययन करो, उसमें जो कुछ है उस पर अमल करो, और उसे अपनी उम्मत (समुदाय) तक पहुँचाओ!” 461) इससे अभिप्राय तौरात की समझ और दीन (धर्म) की गहरी सूझ-बूझ से है।
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