सूरह मरयम
وَكَانَ يَأْمُرُ أَهْلَهُۥ بِٱلصَّلَوٰةِ وَٱلزَّكَوٰةِ وَكَانَ عِندَ رَبِّهِۦ مَرْضِيًّا
Wa kāna ya'muru ahlahū biṣ-ṣalāti waz-zakāh(ti), wa kāna ‘inda rabbihī marḍiyyā(n).
और अपने लोगों को नमाज़ और ज़कात का हुक्म देता था। और वह अपने रब के यहाँ प्रीतिकर व्यक्ति था
📝 टिप्पणी
463) कुछ मुफ़स्सिरों का मत है कि 'अहलहू' से तात्पर्य उनके परिवार से है, जबकि कुछ अन्य का मानना है कि इससे अभिप्राय उनकी उम्मत (समुदाय) से है।
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