सूरह मरयम

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ يَـٰٓأَبَتِ لِمَ تَعْبُدُ مَا لَا يَسْمَعُ وَلَا يُبْصِرُ وَلَا يُغْنِى عَنكَ شَيْـًٔا

Iż qāla li'abīhi yā abati lima ta‘budu mā lā yasma‘u wa lā yubṣiru wa lā yugnī ‘anka syai'ā(n).

जबकि उसने अपने बाप से कहा, "ऐ मेरे बाप! आप उस चीज़ को क्यों पूजते हो, जो न सुने और न देखे और न आपके कुछ काम आए?

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