सूरह या-सीन

ءَأَتَّخِذُ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةً إِن يُرِدْنِ ٱلرَّحْمَـٰنُ بِضُرٍّ لَّا تُغْنِ عَنِّى شَفَـٰعَتُهُمْ شَيْـًٔا وَلَا يُنقِذُونِ

A'attakhiżu min dūnihī ālihatan iy yuridnir-raḥmānu biḍurril lā tugni ‘annī syafā‘atuhum syai'aw wa lā yunqiżūn(i).

"क्या मैं उससे इतर दूसरे उपास्य बना लूँ? यदि रहमान मुझे कोई तकलीफ़ पहुँचाना चाहे तो उनकी सिफ़ारिश मेरे कुछ काम नहीं आ सकती और न वे मुझे छुडा ही सकते है

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