सूरह या-सीन

وَٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِ ٱللَّهِ ءَالِهَةً لَّعَلَّهُمْ يُنصَرُونَ

Wattakhażū min dūnillāhi ālihatal la‘allahum yunṣarūn(a).

उन्होंने अल्लाह से इतर कितने ही उपास्य बना लिए है कि शायद उन्हें मदद पहुँचे।

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