सूरह या-सीन
مَا يَنظُرُونَ إِلَّا صَيْحَةً وَٰحِدَةً تَأْخُذُهُمْ وَهُمْ يَخِصِّمُونَ
Mā yanẓurūna illā ṣaiḥataw wāḥidatan ta'khużuhum wa hum yakhiṣṣimūn(a).
वे तो बस एक प्रचंड चीत्कार की प्रतीक्षा में है, जो उन्हें आ पकड़ेगी, जबकि वे झगड़ते होंगे
📝 टिप्पणी
643) उस चीख (चिंग्घाड़) से तात्पर्य सूर (शंख) के पहले फूंके जाने की आवाज़ से है जो इस ब्रह्मांड (सृष्टि) को नष्ट कर देगी।
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