सूरह या-सीन
قِيلَ ٱدْخُلِ ٱلْجَنَّةَ ۖ قَالَ يَـٰلَيْتَ قَوْمِى يَعْلَمُونَ
Qīladkhulil-jannah(ta), qāla yā laita qaumī ya‘lamūn(a).
कहा गया, "प्रवेश करो जन्नत में!" उसने कहा, "ऐ काश! मेरी क़ौम के लोग जानते
📝 टिप्पणी
640) आख्यानों (रिवायतों) के अनुसार, उस व्यक्ति की हत्या उसकी कौम (लोगों) द्वारा कर दी गई थी जैसा कि आयत 20-25 में उल्लेख है। मृत्यु की पीड़ा (सकरातुल-मौत) के समय, फ़रिश्ते उसे यह खुशखबरी देने के लिए उतरे कि अल्लाह सुबहानहु व ताआला ने उसके गुनाह माफ़ कर दिए हैं और उसके लिए स्वर्ग (जन्नत) तैयार की है।
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