सूरह या-सीन

إِنِّىٓ ءَامَنتُ بِرَبِّكُمْ فَٱسْمَعُونِ

Innī āmantu birabbikum fasma‘ūn(i).

"मैं तो तुम्हारे रब पर ईमान ले आया, अतः मेरी सुनो!"

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