सूरह या-सीन

فَلَا يَسْتَطِيعُونَ تَوْصِيَةً وَلَآ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمْ يَرْجِعُونَ

Falā yastaṭī‘ūna tauṣiyataw wa lā ilā ahlihim yarji‘ūn(a).

फिर न तो वे कोई वसीयत कर पाएँगे और न अपने घरवालों की ओर लौट ही सकेंगे

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