सूरह या-सीन

إِن كَانَتْ إِلَّا صَيْحَةً وَٰحِدَةً فَإِذَا هُمْ خَـٰمِدُونَ

In kānat illā ṣaiḥataw wāḥidatan fa'iżā hum khāmidūn(a).

वह तो केवल एक प्रचंड चीत्कार थी। तो सहसा क्या देखते है कि वे बुझकर रह गए

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