सूरह या-सीन
إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ ٱتَّبَعَ ٱلذِّكْرَ وَخَشِىَ ٱلرَّحْمَـٰنَ بِٱلْغَيْبِ ۖ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ
Innamā tunżiru manittaba‘aż-żikra wa khasyiyar-raḥmāna bil-gaib(i), fa basysyirhu bimagfiratiw wa ajrin karīm(in).
तुम तो बस सावधान कर रहे हो। जो कोई अनुस्मृति का अनुसरण करे और परोक्ष में रहते हुए रहमान से डरे, अतः क्षमा और प्रतिष्ठामय बदले की शुभ सूचना दे दो
📝 टिप्पणी
638) पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) द्वारा दी गई चेतावनी केवल उसी व्यक्ति के लिए लाभदायक है जो उसका अनुसरण करने (पीछा करने) को तैयार हो।
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