सूरह अल-इसरा

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَىٰ تِسْعَ ءَايَـٰتٍۭ بَيِّنَـٰتٍ ۖ فَسْـَٔلْ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ إِذْ جَآءَهُمْ فَقَالَ لَهُۥ فِرْعَوْنُ إِنِّى لَأَظُنُّكَ يَـٰمُوسَىٰ مَسْحُورًا

Wa laqad ātainā mūsā tis‘a āyātim bayyinātin fas'al banī isrā'īla iż jā'ahum fa qāla lahū fir‘aunu innī la'aẓunnuka yā mūsā masḥūrā(n).

हमने मूसा को नौ खुली निशानियाँ प्रदान की थी। अब इसराईल की सन्तान से पूछ लो कि जब वह उनके पास आया और फ़िरऔन ने उससे कहा, "ऐ मूसा! मैं तो तुम्हें बड़ा जादूगर समझता हूँ।"

📝 टिप्पणी
440) वे नौ मोजिज़े (चमत्कार) ये हैं: लाठी, चमकता हुआ हाथ, टिड्डियाँ, जुएँ, मेंढक, खून, बाढ़ (तूफान), समुद्र का फटना और पहाड़ (तूर-ए-सीना)।

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