सूरह अल-इसरा

كُلُّ ذَٰلِكَ كَانَ سَيِّئُهُۥ عِندَ رَبِّكَ مَكْرُوهًا

Kullu żālika kāna sayyi'uhū ‘inda rabbika makrūhā(n).

इनमें से प्रत्येक की बुराई तुम्हारे रब की स्पष्ट में अप्रिय ही है

📝 टिप्पणी
429) इससे तात्पर्य उन निषेधों (वर्जनाओं) से है जिनका उल्लेख इस सूरह की आयत 22, 23, 26, 29, 31, 32, 33, 34, 36 और 37 में किया गया है।

सभी आयत 111 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।