सूरह अल-इसरा

وَلَا تَجْعَلْ يَدَكَ مَغْلُولَةً إِلَىٰ عُنُقِكَ وَلَا تَبْسُطْهَا كُلَّ ٱلْبَسْطِ فَتَقْعُدَ مَلُومًا مَّحْسُورًا

Wa lā taj‘al yadaka maglūlatan ilā ‘unuqika wa lā tabsuṭhā kullal-basṭi fa taq‘uda malūmam maḥsūrā(n).

और अपना हाथ न तो अपनी गरदन से बाँधे रखो और न उसे बिलकुल खुला छोड़ दो कि निन्दित और असहाय होकर बैठ जाओ

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