सूरह अल-इसरा

سُنَّةَ مَن قَدْ أَرْسَلْنَا قَبْلَكَ مِن رُّسُلِنَا ۖ وَلَا تَجِدُ لِسُنَّتِنَا تَحْوِيلًا

Sunnata man qad arsalnā qablaka mir rusulinā wa lā tajidu lisunnatinā taḥwīlā(n).

यही कार्य-प्रणाली हमारे उन रसूलों के विषय में भी रही है, जिन्हें हमने तुमसे पहले भेजा था और तुम हमारी कार्य-प्रणाली में कोई अन्तर न पाओगे

📝 टिप्पणी
435) इससे तात्पर्य यह है कि जो भी उम्मत (समुदाय) अपने रसूल (दूत) को निकालती है, अल्लाह सुब्हानहू व तआला उसे अवश्य ही नष्ट कर देता है। यही अल्लाह सुब्हानहू व तआला की सुन्नत (नियम) है।

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