सूरह अल-इसरा

وَقُرْءَانًا فَرَقْنَـٰهُ لِتَقْرَأَهُۥ عَلَى ٱلنَّاسِ عَلَىٰ مُكْثٍ وَنَزَّلْنَـٰهُ تَنزِيلًا

Wa qur'ānan faraqnāhu litaqra'ahū ‘alan-nāsi ‘alā mukṡiw wa nazzalnāhu tanzīlā(n).

और क़ुरआन को हमने थोड़ा-थोड़ा करके इसलिए अवतरित किया, ताकि तुम ठहर-ठहरकर उसे लोगो को सुनाओ, और हमने उसे उत्तम रीति से क्रमशः उतारा है

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