सूरह अल-इसरा
وَقُل رَّبِّ أَدْخِلْنِى مُدْخَلَ صِدْقٍ وَأَخْرِجْنِى مُخْرَجَ صِدْقٍ وَٱجْعَل لِّى مِن لَّدُنكَ سُلْطَـٰنًا نَّصِيرًا
Wa qur rabbi adkhilnī mudkhala ṣidqiw wa akhrijnī mukhraja ṣidqiw waj‘al lī mil ladunka sulṭānan naṣīrā(n).
और कहो, "मेरे रब! तू मुझे ख़ूबी के साथ दाख़िल कर और ख़ूबी के साथ निकाल, और अपनी ओर से मुझे सहायक शक्ति प्रदान कर।"
📝 टिप्पणी
438) इस दुआ (प्रार्थना) का उद्देश्य अल्लाह सुब्हानहू व तआला से यह याचना करना है कि हम किसी भी इबादत (पूजा) में अच्छी नीयत और पूर्ण इख़्लास (सच्चाई) के साथ प्रवेश करें और उसी के साथ उसे पूरा करें, तथा वह रिया (दिखावे) और पुण्य को नष्ट करने वाली चीज़ों से मुक्त हो। यह आयत नबी को मक्का से मदीना हिजरत (प्रवासन) करने का संकेत भी देती है। कुछ लोग यह भी समझते हैं कि इस आयत में अल्लाह सुब्हानहू व तआला से यह प्रार्थना है कि हम क़ब्र में भी भलाई के साथ प्रवेश करें और पुनरुत्थान के दिन (क़ियामत) वहाँ से भलाई के साथ ही निकलें।