सूरह अल-इसरा

قُلِ ٱدْعُوا۟ ٱلَّذِينَ زَعَمْتُم مِّن دُونِهِۦ فَلَا يَمْلِكُونَ كَشْفَ ٱلضُّرِّ عَنكُمْ وَلَا تَحْوِيلًا

Qulid‘ul-lażīna za‘amtum min dūnihī falā yamlikūna kasyfaḍ-ḍurri ‘ankum wa lā taḥwīlā(n).

कह दो, "तुम उससे इतर जिनको भी पूज्य-प्रभु समझते हो उन्हें पुकार कर देखो। वे न तुमसे कोई कष्ट दूर करने का अधिकार रखते है और न उसे बदलने का।"

📝 टिप्पणी
430) इससे तात्पर्य उन चीज़ों से है जिन्हें वे पूज्य (ईश्वर) मानते थे, यानी मूर्तियाँ, फ़रिश्ते, जिन्न आदि।

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