सूरह अल-इसरा

۞ وَقَضَىٰ رَبُّكَ أَلَّا تَعْبُدُوٓا۟ إِلَّآ إِيَّاهُ وَبِٱلْوَٰلِدَيْنِ إِحْسَـٰنًا ۚ إِمَّا يَبْلُغَنَّ عِندَكَ ٱلْكِبَرَ أَحَدُهُمَآ أَوْ كِلَاهُمَا فَلَا تَقُل لَّهُمَآ أُفٍّ وَلَا تَنْهَرْهُمَا وَقُل لَّهُمَا قَوْلًا كَرِيمًا

Wa qaḍā rabbuka allā ta‘budū illā iyyāhu wa bil-wālidaini iḥsānā(n), immā yabluganna ‘indakal-kibara aḥaduhumā au kilāhumā falā taqul lahumā uffiw wa lā tanhar humā wa qul lahumā qaulan karīmā(n).

तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि उसके सिवा किसी की बन्दगी न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच जाएँ तो उन्हें 'उँह' तक न कहो और न उन्हें झिझको, बल्कि उनसे शिष्टतापूर्वक बात करो

📝 टिप्पणी
426) माता-पिता को केवल "उफ़" (या कोई अन्य कठोर शब्द) कहना भी धर्म में वर्जित है, उनके साथ इससे अधिक कठोर व्यवहार करना तो दूर की बात है।

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