सूरह आल-इमरान

إِنَّمَا ذَٰلِكُمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ يُخَوِّفُ أَوْلِيَآءَهُۥ فَلَا تَخَافُوهُمْ وَخَافُونِ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ

Innamā żālikumusy-syaiṭānu yukhawwifu auliyā'ah(ū), falā takhāfūhum wa khāfūni in kuntum mu'minīn(a).

वह तो शैतान है जो अपने मित्रों को डराता है। अतः तुम उनसे न डरो, बल्कि मुझी से डरो, यदि तुम ईमानवाले हो

📝 टिप्पणी
136) सूरह आलि इमरान (3:28) की पाद-टिप्पणी देखें।

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